धर्म्यविजय-नियमाः
Rules for Dharmic Victory in Kṣatriya Engagement
साधूनां तु मिथो भेदात् साधुश्नेद् व्यसनी भवेत् । निष्प्राणो नाभिहन्तव्यो नानपत्य: कथंचन
श्रेष्ठ पुरुषों में परस्पर भेद हो जाने से यदि कोई श्रेष्ठ पुरुष संकट में पड़ जाए, तो उस पर प्रहार नहीं करना चाहिए। जो बलहीन हो और संतानहीन हो, उस पर तो किसी प्रकार भी आघात न करे।
भीष्म उवाच