Vāmadeva’s Counsel on Rooted Kingship and Non-violent Victory (वामदेवोपदेशः—दृढमूलराजधर्मः)
तक्षेदात्मानमेवं स वन॑ परशुना यथा । यः सम्यग वर्तमानेषु स्वेषु मिथ्या प्रवर्तते
जो अपने ही स्वजनों में, जो उसके प्रति सद्व्यवहार करते हैं, मिथ्या और कपटपूर्ण आचरण करता है—वह मानो कुल्हाड़ी से वन काटने की भाँति, अपने ही आचरण द्वारा अपना ही नाश कर डालता है।
वामदेव उवाच