Kośārtha-Rājadharma: Ethical Revenue Collection and Social Regulation (कोशार्थ-राजधर्मः)
धनिन: पूजयेन्नित्यं पानाच्छादनभोजनै: । वक्तव्य श्षानुगृह्नी ध्वं प्रजा: सह मयेति वै
राजा को चाहिए कि वह देश के धनी जनों का नित्य भोजन, वस्त्र तथा अन्न-पान आदि से आदर-सत्कार करे और उनसे विनयपूर्वक कहे—“आप लोग मेरे साथ मिलकर इन प्रजाओं पर अनुग्रह करें।”
भीष्य उवाच