अध्याय ७२ — राजधर्मः: प्रजारक्षण, कर-नीति, दण्ड-नीति, अमात्य-नियोजन
Chapter 72 — Royal Duty: protection of subjects, taxation, punishment, and appointments
भीष्म उवाच समासेनैव ते राजन् धर्मान् वक्ष्यामि शाश्वतान् | विस्तरेणैव धर्माणां न जात्वन्तमवाप्नुयात्
भीष्म बोले— राजन्! मैं तुम्हें संक्षेप में ही सनातन राजधर्म बताऊँगा; विस्तार से कहने लगूँ तो उन धर्मों का अंत कभी नहीं आ सकता।
भीष्म उवाच