Daṇḍanīti and the King as the Cause of Yuga-Order (दण्डनीतिः राजधर्मश्च युगकारणत्वम्)
श्रोतुं चैव न्यसेद् राजा प्राज्ञान् सर्वार्थदर्शिन: । व्यवहारेषु सतत तत्र राज्यं प्रतिष्ठितम्
राजा न्याय करते समय वादी-प्रतिवादी की बातों को सुनने के लिए सदा सर्वार्थदर्शी प्राज्ञ विद्वानों को अपने पास बैठाए रखे; क्योंकि विशुद्ध न्याय पर ही राज्य प्रतिष्ठित होता है।
भीष्म उवाच