Kṣātra-Dharma, Daṇḍanīti, and Social Order
Indra–Māndhātṛ Dialogue
एकैकमात्मन: कर्म तुलयित्वा55श्रमं पुरा । राजान: पर्युपासन्त दृष्टान्तवचने स्थिता:
पूर्वकाल में उन राजाओं ने आश्रम-सम्बन्धी प्रत्येक कर्म को दण्डनीति के साथ तौलकर देखा और श्रम तथा श्रेष्ठता के विषय में संशय में पड़ गये। इसलिए सिद्धान्त जानने के लिये वे दृष्टान्त-वचनों पर स्थित होकर भगवान् की उपासना करने लगे।
भीष्म उवाच