Bhīṣma on the Śara-Śayyā: Yudhiṣṭhira and Kṛṣṇa Approach the Eldest for Śānti
शराभिघातदु:खात् ते कच्चिद् गात्रं न दूयते । मानसादपि दु:खाद्धि शारीरं बलवत्तरम्
“बाणों के आघात से जो पीड़ा आपको सहनी पड़ी, उससे कहीं आपके अंग-प्रत्यंग अधिक तो नहीं दुख रहे? क्योंकि मानसिक दुःख से भी शारीरिक दुःख अधिक प्रबल होता है।”
वैशम्पायन उवाच