Bhīṣma’s Śara-śayyā Stuti to Vāsudeva and Yogic Preparation for Dehotsarga
Body-Relinquishment
ऋग्यजु:सामधामानं दशार्धहविरात्मकम् | यं सप्ततन्तुं तन्वन्ति तस्मै यज्ञात्मने नमः
ऋग्, यजुः और साम—ये जिनके धाम हैं; दश और अर्ध—अर्थात् पाँच प्रकार के हविष्य जिनका स्वरूप है; और गायत्री आदि सात छन्द जिनके सात तन्तु हैं—उस यज्ञात्मा परमात्मा को प्रणाम है।
भीष्म उवाच