Āścarya-kathana: Brāhmaṇa–Nāga Dialogue on Sūrya (Vivasvat) and the ‘Second Sun’ Phenomenon
अहिंसकैरात्मविद्धि: सर्वभूतहिते रतै: । भवेत् कृतयुगप्राप्तिराशी:कर्मविवर्जिता
vaiśampāyana uvāca | ahiṃsakair ātmavidbhiḥ sarvabhūtahite rataiḥ | bhavet kṛtayugaprāptir āśīḥ karmavivarjitā, nareśvara |
नरेश्वर! यदि अहिंसक, आत्मज्ञानी और सर्वभूतहित में रत जनों से जगत् भर जाय, तो यहाँ कृतयुग की प्राप्ति हो; और फल-आशा से किए जाने वाले कर्मों का परित्याग हो जाय। ऐसे एकान्त भक्त दुर्लभ हैं, क्योंकि ऐसे पुरुष बहुत नहीं होते।
वैशम्पायन उवाच