Atithi-satkāra and the Consolation of Wise Counsel (अतिथिसत्कारः प्रज्ञानवचनस्य च पराश्वासनम्)
अद्यप्रभृति श्रीवत्स: शूलाडुको मे भवत्वयम् । मम पाण्यड्कितश्नापि श्रीकण्ठस्त्वं भविष्यसि
आज से तुम्हारे शूल का यह चिह्न मेरे वक्षःस्थल पर ‘श्रीवत्स’ के नाम से प्रसिद्ध होगा; और मेरे हाथ के चिह्न से अंकित होने के कारण तुम भी ‘श्रीकण्ठ’ कहलाओगे।
अर्जुन उवाच