एकान्तिधर्म-प्रश्नः (Inquiry into Ekāntin Dharma) / The Origin and Practice of Single-Pointed Nārāyaṇa-Centered Discipline
उशना बृहस्पतिश्वैव यदोत्पन्नौ भविष्यत: । तदा प्रवक्ष्यत: शास्त्र युष्मन्मतिभिरुद्धृतम्
जब उशना (शुक्राचार्य) और बृहस्पति प्रकट होंगे, तब वे भी तुम्हारी बुद्धि से निकले हुए इस शास्त्र का प्रवचन करेंगे।
भीष्म उवाच