नरनारायण-नारदसंवादः
Nara-Nārāyaṇa–Nārada Discourse on Vision, Elements, and Entry into Vāsudeva
निरपेक्ष: शुको भूत्वा नि:स्नेहो मुक्तसंशय: । मोक्षमेवानुसंचिन्त्य गमनाय मनो दथे
परन्तु शुकदेव स्नेह-बन्धन तोड़कर निरपेक्ष हो चुके थे। तत्त्व-विषय में उनका कोई संशय न रहा; इसलिए बार-बार मोक्ष का ही चिन्तन करते हुए उन्होंने वहाँ से जाने का निश्चय किया।
नारद उवाच