अध्याय ३३१: नारायणकथा-प्रशंसा तथा नारदस्य श्वेतद्वीप-निवृत्ति एवं बदरी-आगमनम् | Chapter 331: Praise of the Nārāyaṇa Narrative; Nārada’s Return from Śvetadvīpa and Arrival at Badarī
भूतेषु भावं संचिन्त्य ये बुद्ध्वा मनस: परम् । न शोचन्ति गताध्वान: पश्यन्त: परमां गतिम्
जो मनुष्य समस्त प्राणियों में मन से परे स्थित परमात्मा को जानकर उसी का चिन्तन करते हैं, वे संसार-यात्रा पूर्ण होने पर परमगति का साक्षात्कार करके शोक से परे हो जाते हैं।
नारद उवाच