Nārāyaṇasya Guhya-nāmāni Niruktāni (Etymologies of Nārāyaṇa’s Secret Epithets) / नारायणस्य गुह्यनामानि निरुक्तानि
सर्वभूतस्य संयोगो नाशुभेनोपपद्यते | उस परावरदर्शी ज्ञानी पुरुषकी ज्ञाममूलक शक्ति कभी नष्ट नहीं होती। जो सम्पूर्ण भूतोंको सभी अवस्थाओंमें सदा देखा करता है
सर्वभूतों का संयोग अशुभ से नहीं होता। परावरदर्शी ज्ञानी पुरुष की ज्ञानमूलक शक्ति कभी नष्ट नहीं होती। जो समस्त भूतों को सब अवस्थाओं में सदा देखता है, वह सब प्राणियों के सहवास में आकर भी कभी अशुभ कर्मों से युक्त नहीं होता, अर्थात् अशुभ कर्म नहीं करता।
नारद उवाच