Nārāyaṇasya Guhya-nāmāni Niruktāni (Etymologies of Nārāyaṇa’s Secret Epithets) / नारायणस्य गुह्यनामानि निरुक्तानि
शुभेर्लभति देवत्वं व्यामिश्रैर्जन्म मानुषम् । अशुभैश्वाप्यधो जन्म कर्मभिलभतेडवश:
जीव सदा कर्मों के अधीन रहता है। शुभ कर्मों के अनुष्ठान से वह देवत्व पाता है, शुभ-अशुभ के मिश्रण से मनुष्य-जन्म, और केवल अशुभ कर्मों से पशु-पक्षी आदि नीच योनियों में जन्म लेता है।
नारद उवाच