Aśoka-śāstra: Nārada’s Instruction on the Cessation of Śoka
Grief
ब्रह्माणमाप्रोति विभुं मूर्थ्ना देवाग्रजं तथा । एतान्युत्क्रमणस्थानान्युक्तानि मिथिलेश्वर
मस्तक से प्राणों का परित्याग करने पर मनुष्य देवताओं के अग्रज, विभु भगवान् ब्रह्मा के लोक को प्राप्त होता है। मिथिलेश्वर! ये प्राण-निष्क्रमण के स्थान कहे गए हैं।
याज्ञवल्क्य उवाच