एतेन केवल याति त्यक्त्वा देहमसाक्षिकम् | कालेन महता राजन् श्रुतिरेषा सनातनी
राजन्! इस साधना के द्वारा मनुष्य दीर्घ काल के पश्चात् इस अचेतन देह का परित्याग करके केवल—प्रकृति-संसर्ग से रहित—परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त हो जाता है; ऐसी यह सनातन श्रुति है।
याज़्ञवल्क्य उवाच