Śukasya Janma-yoga-phalaṁ — Vyāsasya Tapasā Putrārthaḥ (Śānti-parva 310)
मनसस्तु समुद्भधूता महा भूता नराधिप । चतुर्थ सर्गमित्येतन्मानसं विद्धि मे मतम्,राजन! मनसे पाँच सूक्ष्म महाभूत उत्पन्न हुए हैं। यह चौथा सर्ग है। मेरे मतके अनुसार इसे मानसी सृष्टि समझो
manasastu samudbhūtā mahābhūtā narādhipa | caturthaḥ sarga ity etan mānasaṃ viddhi me matam, rājan ||
याज्ञवल्क्य बोले—नराधिप! मन से महाभूत उत्पन्न होते हैं। यह चौथा सर्ग है; मेरे मत में इसे मानसी (मनोज) सृष्टि समझो।
याज़्ञवल्क्य उवाच