Śukasya Janma-yoga-phalaṁ — Vyāsasya Tapasā Putrārthaḥ (Śānti-parva 310)
अहडूकाराच्च सम्भूतं मनो भूतगुणात्मकम् | तृतीय: सर्ग इत्येष आहड्कारिक उच्यते,अहंकारसे मन उत्पन्न हुआ है, जो पञ्चभूत और शब्दादि गुणस्वरूप है। इसे तीसरा और आहंकारिक सर्ग कहा जाता है
ahaṅkārāc ca sambhūtaṃ mano bhūta-guṇātmakam | tṛtīyaḥ sarga ity eṣa āhaṅkārika ucyate ||
याज्ञवल्क्य बोले—अहंकार से मन उत्पन्न होता है, जो भूतों और उनके गुणों से युक्त है। इसे तीसरा सर्ग कहा गया है और यह ‘आहंकारिक’ सृष्टि के नाम से प्रसिद्ध है।
याज़्ञवल्क्य उवाच