Śuka’s Nirveda: Vyāsa’s Admonition on Dharma, Impermanence, and ‘Imperishable Wealth’ (अक्षय-धन)
भीष्म उवाच स तु स्वभावसम्पन्नस्तच्छुत्वा मुनिभाषितम् । विनिवर्त्य मन: कामादू धर्मे बुद्धि चकार ह
भीष्म बोले—युधिष्ठिर! वह राजकुमार वसुमान् उत्तम स्वभाव से सम्पन्न था। मुनि के वचन सुनकर उसने मन को कामनाओं से फेर लिया और बुद्धि को धर्म में ही स्थिर कर दिया।
भीष्म उवाच