Adhyātma–Adhibhūta–Adhidaivata Correspondences and the Triguṇa Lakṣaṇas (Śānti-parva 301)
इन्द्रियाणां तु सर्वेषां स्वस्थानेष्वेव सर्वश: । आक्रम्य गतय: सूक्ष्माश्चरत्यात्मा न संशय:
स्वप्नावस्था में अपने-अपने स्थानों में स्थित समस्त इन्द्रियों की सब गतियों को आक्रान्त करके जीवात्मा सूक्ष्म विषयों में विचरण करता है—इसमें कोई संशय नहीं।
भीष्म उवाच