Adhyātma–Adhibhūta–Adhidaivata Correspondences and the Triguṇa Lakṣaṇas (Śānti-parva 301)
वर्णानां च क्षयं दृष्टवा क्षयान्तं च पुन: पुन: । जरामृत्युं तथा जन्म दृष्टवा दुःखानि चैव ह
वर्णों का क्षय और उस क्षय का अन्त भी बारंबार देखकर, तथा जन्म, जरा और मृत्यु के दुःखों पर दृष्टिपात करके—मनुष्य को वैराग्य और विवेक जगाना चाहिए।
भीष्म उवाच