Adhyātma–Adhibhūta–Adhidaivata Correspondences and the Triguṇa Lakṣaṇas (Śānti-parva 301)
वासं कुलेषु जन्तूनां दुःखं विज्ञाय भारत । ब्रह्मघ्नानां गति ज्ञात्वा पतितानां सुदारुणाम्
भरतनन्दन! प्राणियों का कुल-घर में निवास भी दुःखरूप है—इसे भलीभाँति समझो। और ब्रह्मघाती तथा पतित जनों की जो अत्यन्त भयंकर दुर्गति होती है, उसे जानकर पाप से मन को हटाओ।
भीष्म उवाच