Vidyā–Avidyā and the Twenty-Fifth Principle
Sāṃkhya–Yoga Clarification
ततः फलार्थ सर्वस्य भवन्ति ज्यायसे गुणा: । धर्मवृत्त्या च सततं कामार्थाभ्यां न हीयते
ततः (मोक्षरूप) फल की प्राप्ति के लिये शम-दम आदि श्रेष्ठ गुण उत्पन्न होते हैं। और जो निरन्तर धर्म-वृत्ति से चलता है, वह काम और अर्थ—भोग और धन—से भी कभी हीन नहीं होता।
पराशर उवाच