Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
मनो मे रमतां सत्ये त्वत्प्रसादादू हुताशन । “एक समय अमग्निदेवने उन्हें वर माँगनेके लिये कहा
एक समय अग्निदेव ने राजा गय से कहा—“वर माँगो।” तब राजा गय ने कहा—“हे हुताशन! आपकी कृपा से दान करते हुए मेरे पास अक्षय धन-कोष भरा रहे; धर्म में मेरी श्रद्धा बढ़ती रहे; और मेरा मन सदा सत्य में ही रमण करे।”
वायुदेव उवाच