Adhyāya 284: Tapas as a Corrective to Household Attachment
Parāśara’s Instruction
बालानुचरगोप्ताय बालक्रीडनकाय च । नमो वृद्धाय लुब्धाय क्षुब्धाय क्षोभणाय च
bālānucaragoptāya bālakrīḍanakāya ca | namo vṛddhāya lubdhāya kṣubdhāya kṣobhaṇāya ca ||
भीष्म बोले— बालकों और उनके संगियों के रक्षक तथा बालकों के साथ क्रीड़ा करने वाले आपको नमस्कार है। सबमें श्रेष्ठ-वृद्ध, भक्ति और प्रेम के लोभी, दुष्टों के पापाचार से क्षुब्ध होने वाले और दुराचारियों को क्षोभ में डालने वाले आपको प्रणाम है।
भीष्म उवाच