वृत्ति-सत्सङ्ग-दान-धर्म
Livelihood, Virtuous Association, and Ethics of Giving
दारितश्न स वज़ेण महायोगी महासुर: । जगाम परम॑ स्थान विष्णोरमिततेजस:,वज्से विदीर्ण हुआ महायोगी एवं महान् असुर वृत्र अमिततेजस्वी भगवान् विष्णुके परम धामको चला गया
dāritaḥ sa vajreṇa mahāyogī mahāsuraḥ | jagāma paramaṁ sthānaṁ viṣṇor amitatejasaḥ ||
वज्र से विदीर्ण होकर वह महायोगी, महान् असुर वृत्र, अमिततेजस्वी भगवान् विष्णु के परम धाम को चला गया।
भीष्म उवाच