वृत्ति-सत्सङ्ग-दान-धर्म
Livelihood, Virtuous Association, and Ethics of Giving
रन्ध्रागतमथाश्चानां शिखोद्भेदश्न बर्हिणाम् । नेत्ररोग: कोकिलस्य ज्वरः प्रोक्तो महात्मना
भीष्म बोले—घोड़ों के गले के छिद्र में जो मांस-वृद्धि हो जाती है, वही उनका ज्वर है। मोरों के लिए शिखा का निकल आना ही ज्वर कहा गया है। और कोकिल का नेत्र-रोग भी महात्मा (शिव) ने ज्वर बताया है।
भीष्म उवाच