श्रेयो-धर्मकर्मविचारः
Inquiry into Śreyas, Dharma, and Karma
तस्मादुपावृत्य ततः क्रमेण सो5ग्रेण संतिष्ठति भूतसर्गम् । स सप्तकृत्वश्न परैति लोकान् संहारविक्षेपकृतप्रभाव:
भीष्म बोले— वहाँ से लौटकर वह क्रमशः और भी श्रेष्ठ भूतसर्ग (देव आदि योनियों) की ओर अग्रसर होता है। संहार-विक्षेप से उत्पन्न अपने प्रभाव के कारण वह सात बार लोकों को पार करता हुआ, एक कल्प तक उनमें प्रतिष्ठित रहता है।
भीष्म उवाच