उशनसः (शुक्रस्य) चरितम् — The Account of Uśanā (Śukra): Yoga, Grievance, and Pacification
युयुत्सुना महेन्द्रेण पुंसा सार्थ महात्मना । ततो मे भगवान् दृष्टो हरिनारायण: प्रभु:
युद्ध की इच्छा से महात्मा देवराज इन्द्र जब मेरे सम्मुख आए, तब उनके साथ सहायक रूप में आए हुए सर्वेश्वर भगवान् हरि-नारायण के भी मैंने दर्शन किए।
भीष्म उवाच