Jvarotpatti — The Origin and Distribution of Jvara
Fever
पुण्यपापक्षयार्थ हि सांख्यज्ञानं विधीयते । तत्क्षये हुस्य पश्यन्ति ब्रह्मुभावे परां गतिम्
पुण्य और पाप के क्षय के लिये ही सांख्य-ज्ञान का विधान किया गया है। उनका क्षय हो जाने पर जब जीवात्मा ब्रह्मभाव को प्राप्त होती है, तब विद्वान लोग उसी को उसकी परमगति मानते हैं।
असित उवाच