Adhyāya 270 — Yudhiṣṭhira’s inquiry on saṃnyāsa; Bhīṣma on calculable time, tamas, and karma
Vṛtra–Uśanā exemplum begins
भीष्म उवाच अत्र ते वर्तयिष्यामि इतिहासं पुरातनम् । कुण्डधारेण यत् प्रीत्या भक्तायोपकृतं पुरा
भीष्म ने कहा—राजन्! इस विषय में मैं तुम्हें एक प्राचीन इतिहास सुनाता हूँ। पूर्वकाल में कुण्डधार नामक मेघ ने प्रसन्न होकर अपने एक भक्त पर उपकार किया था।
भीष्म उवाच