परिव्राजक-आचारः (Conduct of the Wandering Renunciant) — Mahābhārata, Śānti-parva 269
कपिल उवाच परिग्रहा: शुभा: सर्वे गुणतो<5भ्युदयाश्व ये । नतु त्यागसुखं प्राप्ता एतत् त्वमपि पश्यसि
कपिल ने कहा—सत्त्वगुण से प्रकट हुए ये सब परिग्रह शुभ तो हैं, पर त्याग में जो सुख है, उसे इनमें से कोई भी नहीं पा सका। यह बात तुम भी देख रहे हो।
कपिल उवाच