तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
वे मोक्षकी प्राप्ति और सर्वस्वके त्यागके लिये अपनी बुद्धिमें दृढ़ निश्चय रखते हैं। ब्रह्मके ध्यानमें तत्पर एवं ब्रह्मस्वरूप होकर ब्रह्ममें ही निवास करते हैं ।।
वे शोक से रहित और रजोगुण से परे होते हैं; उनके लोक सनातन हैं। उनकी परम गति प्राप्त हो जाने पर गृहस्थाश्रम का क्या प्रयोजन रह जाता है?
कपिल उवाच