कपिलगोसंवादे गृहस्थ-त्यागधर्मयोः प्रमाण्यविचारः
Kapila–Cow Dialogue: Authority of Householder and Renunciant Dharmas
स कदाचित्निराहारो वायुभक्षो महातपा: । तस्थौ काष्ठवदव्यग्रो न चचाल च कहिचित्
एक समय की बात है—वे महातपस्वी जाजलि निराहार रहकर वायु-भक्षण करते हुए काष्ठ की भाँति खड़े हो गए। उस समय उनके चित्त में तनिक भी व्यग्रता न थी और वे क्षणभर के लिए भी कभी विचलित नहीं होते थे।
भीष्म उवाच