चिरकारि-उपाख्यानम् / The Exemplum of Cirakārī: Deliberation Before Irreversible Action
सर्वतः शड़्कते स्तेनो मृगो ग्राममिवेयिवान् । बहुधा5<चरितं पापमन्यत्रैवानुपश्यति
sarvataḥ śaṅkate steno mṛgo grāmam iveyivān | bahudhā caritaṃ pāpam anyatraivānupaśyati ||
गाँव में आ गए हिरण की भाँति चोर सब से शंका करता रहता है। उसने स्वयं बार-बार जैसा पापाचार किया है, वैसा ही पाप दूसरों में भी देखता है।
भीष्म उवाच