मृत्योर्ब्रह्मणा नियोजनम् — The Commissioning of Mṛtyu by Brahmā
अविशेषाणि भूतानि गुणांश्व जहतो मुने: । सुखेनापोहाते दुःखं भास्करेण तमो यथा
aviśeṣāṇi bhūtāni guṇāṁś ca jahato muneḥ | sukhena apohate duḥkhaṁ bhāskareṇa tamo yathā ||
व्यास ने कहा—जो मुनि गुणों का त्याग कर देता है, उसके लिए समस्त प्राणी अविशेष (भेदरहित) हो जाते हैं। उसके दुःख सहज ही दूर हो जाते हैं—जैसे सूर्य के उदय से अन्धकार।
व्यास उवाच