Ātma-saṃyama-dharma: One-pointedness of Mind and Senses (शुक–व्यास संवादः)
कुर्यात् कृत्वा च तत्सर्वमाख्येयं गुरवे पुन: । “ब्रह्म! इसके सिवा और भी जिन कार्योंके लिये आप आज्ञा देंगे
वह सब कार्य करके फिर गुरु को सब कुछ निवेदन करे— “ब्रह्मन्! इसके अतिरिक्त आज आप जिन कार्यों की आज्ञा देंगे, उन्हें भी मैं शीघ्र पूरा कर दूँगा।” इस प्रकार विधिपूर्वक सब बातें कहकर गुरु की आज्ञा लेकर दूसरा कार्य करे; उसे पूरा करके फिर उसका सारा समाचार गुरुजी को बताए।
व्यास उवाच