Ātma-saṃyama-dharma: One-pointedness of Mind and Senses (शुक–व्यास संवादः)
उत्तानाभ्यां च पाणिभ्यां पादावस्य मृदु स्पृशेत् । दक्षिणं दक्षिणेनैव सव्यं सब्येन पीडयेत्,दोनों हाथ फैलाकर अपने दाहिने हाथसे गुरुका दाहिना चरण और बायें हाथसे उनका बायाँ चरण धीरे-धीरे छूकर प्रणाम करे
uttānābhyāṃ ca pāṇibhyāṃ pādāv asya mṛdu spṛśet | dakṣiṇaṃ dakṣiṇenaiva savyaṃ savyena pīḍayet |
दोनों हाथ फैलाकर अपने दाहिने हाथ से गुरु के दाहिने चरण और बाएँ हाथ से उनके बाएँ चरण को धीरे-धीरे स्पर्श कर, विधिपूर्वक प्रणाम करे।
व्यास उवाच