Ātma-saṃyama-dharma: One-pointedness of Mind and Senses (शुक–व्यास संवादः)
व्यास उवाच ब्रह्मचारी गृहस्थश्व वानप्रस्थो5थ भिक्षुक: । यथोक्तचारिण: सर्वे गच्छन्ति परमां गतिम्
व्यासजी बोले—बेटा! ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासी—ये सभी अपने-अपने आश्रम के लिए विहित शास्त्रोक्त कर्मों का पालन करते हुए परम गति को प्राप्त होते हैं।
व्यास उवाच