Śaṅkha–Likhita Upākhyāna: Daṇḍa, Confession, and the Purification of Kingship (शङ्ख-लिखितोपाख्यानम्)
अरण्ये दुःखवसतिरनुभूता तपस्विभि: । दुःखस्यान्ते नरव्याप्र सुखान्यनुभवन्तु वै
तपस्वी जनों ने वन में दुःखमय निवास भोगा है। नरव्याघ्र! उस दुःख के अंत में वे निश्चय ही सुख का अनुभव करें।
वैशम्पायन उवाच