Śaṅkha–Likhita Upākhyāna: Daṇḍa, Confession, and the Purification of Kingship (शङ्ख-लिखितोपाख्यानम्)
ये3रक्ष्यमाणा हीयन्ते दैवेनाभ्याहता नृप । तस्करैश्वापि हीयन्ते सर्व तद्् राजकिल्बिषम्
हे नृप! जो लोग राजा की ओर से रक्षित न होने के कारण दैवी आपत्तियों से आहत होकर या चोरों के उपद्रव से नष्ट होते हैं—उनके उस समस्त विनाश का पाप राजदोष ही माना जाता है।
वैशम्पायन उवाच