आत्मदर्शन-उपदेशः (Ātma-darśana Upadeśa) — Mind, Senses, and the All-pervading Self
चत्वार्याहु: सहस्राणि वर्षाणां तत्कृतं युगम् । तस्य तावच्छती संध्या संध्यांशक्ष तथाविध:
catvāry āhuḥ sahasrāṇi varṣāṇāṁ tatkṛtaṁ yugam | tasya tāvacchatī sandhyā sandhyāṁśaś ca tathāvidhaḥ ||
व्यास बोले—बुद्धिमान कहते हैं कि कृत (सत्य) युग चार हजार वर्षों का होता है। उसकी संध्या चार सौ वर्षों की होती है और उतने ही वर्षों का संध्यांश भी होता है; इस प्रकार उसका युग-मान निश्चित होता है।
व्यास उवाच