योग–सांख्यसमन्वयः, रथोपमा, व्यक्त–अव्यक्तविवेकः
Yoga–Sāṃkhya Synthesis, Chariot Allegory, and the Vyakta–Avyakta Distinction
सभासदां च वृद्धानां सतां कथयतां कथा: । प्राहसन्नभ्यसूयंश्न सर्ववृद्धान् गुणावरा:
जब सभा में बैठे हुए सत्पुरुष और वृद्धजन कोई बात कहते हैं, तब गुणहीन दैत्य दोष ढूँढ़ते हुए उन सब वृद्धों का उपहास करते हैं।
शक्र उवाच