Brāhmaṇa-kṛtya, Āśrama-niyama, and Dāna-prasaṃsā
Duties of the Brāhmaṇa, āśrama discipline, and praise of giving
नमुचिर्वाच अनिवार्येण शोकेन शरीरं चोपतप्यते । अमित्राश्ष प्रह्ृष्यन्ति शोके नास्ति सहायता
नमुचि ने कहा—देवराज! यदि शोक को रोका न जा सके तो उससे शरीर संतप्त हो उठता है और शत्रु प्रसन्न होते हैं। शोक से विपत्ति दूर करने में भी कोई सहायता नहीं मिलती।
भीष्म उवाच