कालनिर्णयः, युगधर्मवर्णनम्, सृष्टिक्रमश्च
Time-Reckoning, Yuga-Dharma, and the Sequence of Creation
भूतानां निधन निष्ठा स्रोतसामिव सागर: । नैतत् सम्यग्विजानन्तो नरा मुहान्ति वज्धृक्
हे वज्रधारी इन्द्र! जैसे जल-प्रवाहों का अंतिम आश्रय समुद्र है, वैसे ही देहधारियों की अंतिम निष्ठा मृत्यु है। जो पुरुष इसे भली-भाँति जानते हैं, वे कभी मोह में नहीं पड़ते।
श॒क्र उवाच