कालनिर्णयः, युगधर्मवर्णनम्, सृष्टिक्रमश्च
Time-Reckoning, Yuga-Dharma, and the Sequence of Creation
नमस्तस्यै दिशे<प्यस्तु यस्यां वैरोचनो बलि: । इति मामभ्यपद्यन्त बुद्धिमात्सर्यमोहिता:
namas tasyai diśe 'py astu yasyāṃ vairocano baliḥ | iti mām abhyapadyanta buddhimātsarya-mohitāḥ ||
शक्र (इन्द्र) बोले— “जिस दिशा में विरोचनपुत्र बलि हों, उस दिशा को भी हमारा नमस्कार है।” मेरे शत्रु अपने ही बुद्धिजन्य मत्सर से मोहित होकर मेरी शरण में आते और इसी प्रकार कहा करते थे।
श॒क्र उवाच