Adhyāya 223: Nāradasya Guṇa-kathana
Catalogue of Nārada’s Virtues
स वर्षति सम वर्षाणि यथाकालमतन्द्रित: । तं बलिं नाधिगच्छामि ब्रद्य॒ुन्नाचक्ष्य मे बलिम्
वह यथासमय आलस्य त्यागकर सब दिशाओं में प्रकाशित होता, वही अस्त होता और वही वर्षा करता था। ब्रह्मन्! उस बलि को मैं ढूँढ़ने पर भी नहीं पा रहा हूँ; आप मुझे राजा बलि का पता बताइए।
भीष्म उवाच