Śakra–Namuci-saṃvāda: Śoka-nivāraṇa and Daiva-vicāra
Indra and Namuci on grief, composure, and inevitability
असंसर्गो हि भूतेषु संसग्गों वा विनाशिषु । कस्मै क्रियेत कल्प्येत निश्चय: को<त्र तत्त्वतः
मृत्यु के पश्चात् जीवात्मा का विनाशशील पंचमहाभूतों से कोई संसर्ग रहता है या नहीं? यदि रहता है तो किस हेतु रहता है? इस विषय में तत्त्वतः क्या निश्चय किया जा सकता है?
जनक उवाच