Śrī–Indra–Bali Saṃvāda: The Departure and Fourfold Placement of Lakṣmī
तस्या: पुत्रत्वमागम्य स्त्रिया: स पिबति स्तनौ । ततः स कापिलेयत्वं लेभे बुद्धिं च नैषछ्लेकीम्
उस स्त्री का पुत्र-भाव प्राप्त करके वह उसके स्तनों का दूध पीता था। इसलिए वह ‘कापिलेय’ कहलाया और उसने ब्रह्म-निष्ठ, वैराग्ययुक्त बुद्धि प्राप्त की।
भीष्म उवाच